राजस्थान राज्यसभा चुनाव: वसुंधरा विरोधी होने की बात गलत, बोले- बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवार घनश्याम तिवाड़ी


राजस्थान 4 की राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव के लिए बीजेपी ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेला है। पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि पार्टी ने सब की सहमति से निर्णय लिया है। वह वसुंधरा विरोधी नहीं है। तिवाड़ी ने कहा कि ये बात बिल्कुल गलत है कि वह पूर्व सीएम वसुंधरा विरोधी है। प्रत्याशी बनाए जाने की शुभकामनाएं एक दिन पहले ही वसुंधरा राजे ने उन्हें फोन पर दे दी थी। पार्टी नेतृत्व ने उनको लेकर सोच समझकर निर्णय लिया है। अब वह पार्टी के निर्णय और अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 वर्ष में जो दिशा देश और पार्टी को दी है, उसी दिशा के अनुरूप वे राज्यसभा के सदन में काम करेंगे।

एक सीट पर बीजेकी की जीत तय 

बीजेपी ने जयपुर में कांग्रेस के ब्राह्मण चेहरे महेश जोशी की काट में घनश्याम तिवाड़ी को राज्यसभा का उम्मीदवार है। राजस्थान की सियासत में घनश्याम तिवाड़ी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के धुर विरोधी माने जाते हैं। तिवाड़ी ने वसुंधरा की वजह के बीजेपी छोड़कर अलग पार्टी बनाई थी। लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। राज्यसभा की 4 में से 2 सीटों पर कांग्रेस और एक सीट पर बीजेपी की जीत तय है। घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि जो मुद्दे उठाए थे। पीएम मोदी ने पूरे कर दिए है। ईबीसी आरक्षण का मुद्दा उन्होंने उठाया था और सदन में कानून भी पेश किया। जिसे प्रधानमंत्री और पार्टी ने संविधान संशोधन के जरिए पूरा कर दिया। आज ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और कायस्थों को 10% आरक्षण का लाभ भी मिल रहा है।

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बीजेपी छोड़ने के बाद भी आरएसएस से जुड़े रहे 

पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी बीजेपी छोड़ने के बाद भी आरएसएस की विचारधारा से जुड़े रहे। तिवाड़ी की उम्मीदवारी से माना जा रहा है कि राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा विरोधी खेमा मजबूत हो रहा है। 12 दिसंबर 2020 को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की उपस्थिति में घनश्याम तिवाड़ी ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तिवाड़ी कांग्रेस में शामिल हो गए थे। घनश्याम तिवाड़ी राजस्थान के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे हैं। भैरोंसिंह शेखावत सरकार में अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा सांसद ओम प्रकाश माथुर, केजे अल्फोंस, रामकुमार वर्मा और हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर का कार्यकाल 4 जुलाई को पूरा होने जा रहा है। यह चारों भाजपा से हैं। नए सदस्यों के लिए 10 जून को मतदान होना है जिसकी चुनाव प्रक्रिया जारी है।



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