अशोक गहलोत का चल गया जादू, समझें कैसे कांग्रेस में बन गए हैं पायलट; सचिन का क्या होगा?


कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सवालों का सामना करने में जुटे हुए हैं तो पार्टी के तमाम नेता दिल्ली में ‘सत्याग्रह’ कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व पर आए इस संकट और केंद्र सरकार के अग्निपथ योजना के खिलाफ पार्टी के नेता एक मंच पर आकर अपना आक्रोश जाहिर कर रहे हैं। इस बीच पार्टी में अशोक गहलोत के बढ़ते दमखम ने भी राजनीतिक जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राज्यसभा चुनाव में जिस तरह अशोक गहलोत ने अपना ‘जादू’ दिखाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मात दी, उसके बाद से राजस्थान के मुख्यमंत्री का कद पार्टी में बढ़ गया है। 

दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और पार्टी कार्यक्रमों में भी गहलोत की बढ़ी ताकत को महसूस किया जा रहा है। यूं तो पिछले कई सालों में लगातार अशोक गहलोत ने पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत की है। लेकिन राज्यसभा में तीन सीटों पर जीत हासिल करके उन्होंने जिस तरह पार्टी की नाक बचाई उससे ना सिर्फ उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच चुका है, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व का भरोसा भी उन पर बढ़ गया है। सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी के करीबी सलाहकार अहमद पटेल की मौत और कई बड़े नेताओं के बागी समूह ‘G23’में चले जाने के बाद गहलोत गांधी परिवार के बेहद खास हो चुके हैं। पिछले महीने उदयपुर चिंतन शिविर के वह मुख्य आयोजक रहे तो राहुल गांधी-सोनिया गांधी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई के खिलाफ सबसे अधिक मुखर नजर आ रहे हैं।

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इंदिरा के साथ शुरुआत, राहुल-प्रियंका का भी साथ
अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर नाम यूं ही नहीं दिया जाता है। तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बन चुके गहलोत उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने इंदिरा गांधी के साथ शुरुआत की थी और अब राहुल-प्रियंका का भी भरोसा जीतने में कामयाब रहे हैं। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और अब राहुल-प्रियंका के दौर में भी गहलोत का जादू बरकरार रहा है। 

राजस्थान में बदलेगा समीकरण, पायलट का क्या होगा?
अशोक गहलोत को राजस्थान में सत्ता संभालने के बाद से ही सचिन पायलट गुट के असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। 2021 में तो एक मौका ऐसा भी आया जब लगा कि मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान में भी कांग्रेस से सत्ता छिन सकती है। ऐन वक्त पर राहुल और प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप से सचिन पायलट मान गए। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट उस समय किए गए वादों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। बताया जाता है कि सचिन ने राजस्थान में ‘पायलट’ बनाए जाने की उम्मीद कायम रखी है, लेकिन राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने गहलोत को पहले से अधिक मजबूत कर दिया है। ऐसे में राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत की मर्जी के बिना कोई भी बदलाव और अधिक मुश्किल हो गया है। 



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