उपेन यादव का गहलोत पर हमला, कहा- पुराने केस खोलकर फिर शुरू कर दी तानाशाही, जानें पूरा मामला


राजस्थान में बेरोजगारों की लंबित मांगों को लेकर संघर्षत उपेन यादव ने कहा कि गहलोत सरकार ने मुझे दबाने और युवा बेरोजगारों की मांग उठाने से रोकने के लिए फिर से तानाशाही शुरू कर दी है। पुराने मुकदमों में न्यायालय में चालान पेश करना शुरू कर दिया है। मानसरोवर थाने में दर्ज मुकदमें आज चालान पेश किया जा रहा है। जिसके लिए मुझे न्यायालय में बुलाया गया है। उपेन यादव हाल ही में जमानत पर रिहा हुए है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पर उपेन यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उपेन यादव ने कहा कि पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा का षड्यंत्र फेल हो गया है। हमें न्यायालय से न्याय मिला है। अब आर-पार की लड़ाई होगी। राज्य के युवा सरकार की दमनकारी नीतियों को विरोध करेंगे। 

युवाओं ने जयपुर में किया था प्रदर्शन 

राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव के नेतृत्व के नेतृत्व में युवाओं ने जयपुर में प्रदर्शन किया था। इस दौरान उपेन यादव और उनके साथियों की पुलिस ने पिटाई की। बाद में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के सामने प्रदर्शन करने पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बेरोजगारों की मांगों को लेकर उपेन यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से भी मिला था। उपेन यादव के अनुसार जो मांगे है। उनका समाधान नहीं हो पा रहा है। इसलिए बेरोजगार आक्रोश रैली निकालनी पड़ी।

उपेन यादव की प्रमुख मांगे 

राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ अध्यक्ष उपेन यादव ने बताया कि पहले बजट में 6 हजार पदों पर टेक्निकल हेल्पर भर्ती की घोषणा की थी, लेकिन 1512 पदों पर ही विज्ञप्ति जारी की गई है। वहीं पंचायती राज जेईएन भर्ती के 1500 पदों पर भर्ती की घोषणा हुई थी, लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी आज तक इस भर्ती की विज्ञप्ति जारी नहीं हो पाई है, तो वहीं कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में जूनियर अकाउंटेंट की भर्ती को शामिल करके इसको लेट किया जा रहा है। इसलिए इस भर्ती को सीईटी से बाहर रखा जाए। साथ ही लम्बे समय से बाहरी राज्यों के परीक्षार्थियों का कोटा निर्धारण या खत्म करने की मांग की जा रही है। इन चार सूत्री मांगों को लेकर लम्बे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। इसलिए बेरोजगारों को फिर से आंदोलन की राह पर उतरना पड़ रहा है। सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। वो बेरोजगारों के साथ वादा खिलाफी कर रहे हैं, जब तक बेरोजगारों की मांग पूरी नहीं होगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा। 



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