गहलोत नए संकट प्रबंधक के रूप में उबरे, कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए बन सकते हैं राइट च्वाइस; पढ़िये ये रिपोर्ट


राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस में नए संकट प्रबंधक के रूप में उभरे हैं। गांधी परिवार इस समय संकट में और उनके समर्थन में दिल्ली में हो रहे विरोध-प्रदर्शन का मुख्य रूप से नेतृत्व सीएम अशोक गहलोत कर रहे हैं। दिल्ली में पूरी रणनीति सीएम अशोक गहलोत कर रहे हैं, जो साफ दिखाता है कि इस समय गांधी परिवार को सबसे ज्यादा विश्वास गहलोत पर है। गहलोत अपने अनुभव और राजनीति कौशल से ऐसी विषम परिस्थितियों से मुकाबला कर सकते हैं। राहुल गांधी ने गहलोत को गुजरात की कमान सौंपी। गहलोत ने गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए शानदार काम किया। गुजरात में एक तरह से कांग्रेस को कमबैक कराया। गहलोत के जरिए कांग्रेस ने बीजेपी के हर वार का डटकर सामना किया। गहलोत के अनुभव का फायदा पार्टी को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान भी देखने को मिल रहा है। अगर वो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो पार्टी को आगे भी इसका फायदा मिल सकता है। चर्चा है कि अगर गांधी परिवार से बाहर कोई कांग्रेस का अध्यक्ष बनता है तो सीएम गहलोत रेस में सबसे आगे हैं।

गहलोत ने दिलाई इंदिरा गांधी की याद 

चर्चा है कि अगर गांधी परिवार से बाहर कोई कांग्रेस का अध्यक्ष बनता है तो सीएम गहलोत रेस में सबसे आगे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए गहलोत गांधी परिवार की पंसद बन सकते हैं। गहलोत ने राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ पर पीएम मोदी पर तीखे प्रहार किए। गहलोत ने बीजेपी को इंदिरा गांधी की याद दिलाई और कहा कि जनता पार्टी की सरकार ने भी इंदिरा गांधी को गिरफ्तार किया था। जेल भरो आंदोलन चला था। इसके बाद इंदिरा गांधी की जबरदस्त वापसी हुई थी। गहलोत रविवार को ही राजसमंद से सीधे  दिल्ली चले गए थेे। दिल्ली में मोर्चा संभाले हुए है। 

राजस्थान के कांग्रेस नेता सबसे ज्यादा सक्रिय

देश की राजधानी दिल्ली में हो रहे कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन में राजस्थान के नेता और कार्यकर्ता सक्रियता सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। गहलोत की रणनीति ने बीजेपी के हाथ-पैर फुला दिए है। कांग्रेस में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका की सराहना की जा रही है। कांग्रेस के प्रदर्शन की कमान सीएम अशोक गहलोत संभाल रहे हैं। खास बात यह है कि सीएम गहलोत के नेतृत्व में सबसे ज्याद नेता एवं कार्यकर्ता राजस्थान से ही दिखाई दे रहे हैं। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, हरीश चौधरी, रघु शर्मा, भंवर जितेंद्र सिंह, सचिन पायलट और रफीक खान दिल्ली में ही डटे रहे। राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीट जीतने के बाद सीएम गहलोत का राष्ट्रीय स्तर पर कद बढ़ा है। गहलोत पार्टी को फिनिशिंग लाइन से आगे खींचने में कामयाब रहे। 

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राहुल गांधी को गहलोत पर भरोसा

अशोक गहलोत की गिनती कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में की जाती है। गहलोत काफी लंबे समय से पार्टी के लिए पूरी वफादारी से काम कर रहे हैं। गहलोत इंदिरा गांधी के साथ ही राजीव गांधी कैबिनेट के सदस्य भी रहे हैं। अब वे गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी यानी राहुल गांधी के साथ मिलकर सियासत के नए दावपेंच चल रहे हैं। गहलोत कांग्रेस की तीन अलग-अलग सरकारों में केंद्रीय मंत्री रहे हैं। नरसिम्हा राव सरकार में भी मंत्री बने। सीएम गहलोत की साफ छवि मानी जाती है। गहलोत की छवि पर ही शायद कोई गहरे दाग-धब्बे होंगे। गहलोत विवादों से भी दूर रहे हैं। बड़ी बात यह है कि गहलोत काफी लो प्रोफाइल रहते हैं। गहलोत राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में गहलोत ने बीजेपी को सत्ता से बाहर करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। गहलोत का राजनीतिक कैरियर 40 साल से भी ज्यादा का है। गहलोत ने राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं।

 



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