गहलोत सरकार के खिलाफ नहीं बन पा रही 'एंटी इंकमबेंसी', प्रदेश नेतृत्व पर उठे सवाल; इनसाइड स्टोरी


राजस्थान में गहलोत सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर नहीं बन पा रही है। राजस्थान बीजेपी नेताओं को भरोसा है कि सत्ता विरोधी बनेगी और विधानसभा चुनाव 2023 में गहलोत सरकार की विदाई हो जाएगी। लेकिन आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2018 में गहलोत सरकार के सत्ता में आने के बाद जिला परिषद के चुनावों को छोड़कर जितने भी चुनाव हुए है उनमें बीजेपी को शिकस्त का सामना करना पड़ा है। विधानसभा उप चुनाव से लेकर राज्यसभा चुनाव तक सीएम गहलोत को जादू जमकर चला है। भाजपा नेतृत्व को इस बात की चिंता है कि गहलोत सरकार को साढ़े तीन से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है कि लेकिन सत्ता विरोधी लहर नहीं बन पा रही है। राजस्थान में पिछले 30 साल से सियासी ट्रेड रहा है कि 5-5 साल बीजेपी और कांग्रेस राज करती रही है।

राजस्थान भाजपा में गुटबाजी चरम पर 

मौजूदा परिस्थितियों की बात करें तो राजस्थान भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खींचतान है। हाल ही में कोटा में हुई बीजेपी की कार्यसमिति की बैठक में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे बिना भाषण दिए हुए ही बैठक से बीच में ही चलीं गई। पार्टी की आंतरिक गुटबाजी पर लगाम कसना नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती है। वसुधरा गुट लगातार सीएम फेस घोषित करने की मांग कर रहा है। वसुंधरा के समर्थकों का कहना है कि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को सीएम फेस घोषित किया जाए। जबकि राजस्थान प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह का कहना है कि विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। 

प्रदेश नेतृत्व पर उठे सवाल

राज्य में गहलोत सरकार के सत्ता में आने के बाद हुए चुनावों में सीएम गहलोत का जादू चला है। पंचायतीराज चुनावों में बीजेपी ने जोड़-तोड़ करके 18 जिला प्रमुख बनाए। जबकि कांग्रेस के 15 जिला प्रमुख बने। इसके बाद 6 महापौर के चुनाव में कांग्रेस 4 और बीजेपी के 2 ही चुने गए। 8 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव में 6 पर कांग्रेस, 2 पर बीजेपी जीत कर सकी। इसी प्रकार 196 नगर निकायों के चुनावों में  125 पर कांग्रेस औऱ 64 पर बीजेपी की जीत दर्ज हुई। कुल 353 पंचायत समिति के प्रधानों में कांग्रेस के 182 औऱ बीजेपी के 139 प्रधान बने।  कुल 7500 पार्षदों में से कांग्रेस के 3036 और बीजेपी के 2676 पार्षद है। राजस्थान राज्यसभा चुनाव में भी सीएम गहलोत ने 4 में से 3 सीट जीतकर भाजपा पटखनी दे दी। राजस्थान में भाजपा के कमजोर होने की वजह से पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पर सवाल उठ रहे हैं।  वसुंधरा गुट दबे स्वरों में सतीश पूनिया को हटाने की मांग कर रहा है। 

पूर्वी राजस्थान में भाजपा का विधायक नहीं 

राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने पर बीजेपी  से बाहर की गई धौलपुर विधायक शोभारानी कुशवाह के बाद अब पूर्वी राजस्थान में बीजेपी के पास अपना कोई विधायक नहीं रह गया है। पूर्वी राजस्थान में बीजीपी विधायक विहीन हो गई है। भरतपुर, करौली और सवाईमाधोपुर में बीजेपी 2018 के विधानसभा चुनाव में एक भी विधायक नहीं जीता पाई थी। धौलपुर से अकेली शोभारानी चुनाव जीतीं थी। उसे अब पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इन सबके बावजूद बीजेपी के नेता दावा कर रहे हैं कि गहलोत सरकार के खिलाफ एंटी इंकमबेंसी है। लिहाजा उसे अगले चुनाव में जीतने से कोई नहीं रोक सकता। पूर्वी राजस्थान में गहलोत सरकार में आधा दर्जन मंत्री शामिल है। वहीं कइयों को निगमों और बोर्डों में जिम्मेदारी देकर गहलोत सरकार ने इस इलाके में अपनी पकड़ कमजोर मजबूत कर रखी है। जाहिर है कि 2023 में बीजेपी का सूरज पूरब से उदय नहीं हुआ तो उसके लिए फिर सत्ता की मंजिल दूर हो जायेगी।

गहलोत बोले- बीजेपी सत्ता विरोधी लहर बनाने में विफल

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीन साल का कार्यकाल पूरा करने पर कहा था कि सरकार के खिलाफ किसी तरह की एंटी इंकंबेंसी नहीं है। गहलोत ने कहा- राजस्थान में हमारे कामों से माहौल बना है। जो काम सरकारी मशीनरी, राजनेताओं ने मिलकर किया है, उससे अच्छा माहौल है। आज तीन साल बाद भी सत्ताविरोधी लहर पैदा नहीं हुई है। मुझे यकीन है कि यही माहौल रहा तो अगली बार सरकार वापस कांग्रेस की ही बनेगी। इसी रूप में हम रात दिन काम करते रहेंगे। कोरोना में भी हमने एक दिन भी आराम नहीं किया।

 



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