राजस्थान में दलित वोट बैंक साधने के लिए मायावती के भतीजे ने बनाया रोडमैप, आकाश आनंद 30 तक रहेंगे प्रदेश के दौरे पर ; जानें वजह


बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान में कांग्रेस-भाजपा को टक्कर देने के लिए रणनीति बनाई है। संगठन में निष्क्रिय नेताओं की जगह सक्रिय नेताओं को जगह देने की कवायद शुरू कर दी है। बसपा उपाध्यक्ष आकाश आनंद ने राजस्थान की कमान अपने हाथ में लेकर बड़े फैसले लिए है। निष्क्रिय कमेटियों को भंग करने के बाद आकाश आनंद राजस्थान के तूफानी दौरे पर है। आकाश आनंद 30 जून तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में पार्टी पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं संग मीटिंग कर बसपा कैडर को मजबूती प्रदान करेंगे। इसकी शुरुआत भी 18 जून को करौली से हो गई है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले राजस्थान में मायावती की बढ़ती सक्रियता सीएम अशोक गहलोत के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। प्रदेश में बसपा की बढ़ती ताकत का नुकसान कांग्रेस को होगा। 

आकाश आनंद की आज भरतपुर में मीटिंग 

आकाश आनंद की आज भरतपुर जिले में मीटिंग है। पार्टी के कार्यक्रम के अनुसार आकाश आनंद 22 जून को धौलपुर, 26 जून को जोधपुर, 27 जून को पाली, 29 जून को हनुमानगढ़ और 30 जून को झुंझुनूं में पार्टी पदाधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगे। मीटिंग का एक ही एजेंडा है बसपा को मजबूती प्रदान करने का। राजस्थान में संगठन को किस तरह चुस्त-दुरुस्त किया जाएं। किन मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया जाएं। इन विभिन्न पहलुओं पर आकाश आनंद रोडमैप तैयार कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि करीब एक महीने पहले मायावती ने राजस्थान की सभी जिला और विधानसभा इकाइयों को भंग कर दिया था। राजस्थान की कमान अपने भतीजे आकाश आनंद को सौंप दी थी। 

 बैलेंस आॅफ पावर में रहने की कवायद

राजस्थान में बसपा के प्रभुत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2018 के चुनाव में बसपा के टिकट पर 6 विधायक चुनाव जीते थे। हालांकि, बाद में सभी विधायकों ने पाला बदल लिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए। बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों की सदस्यता का मामला फिलहाल कोर्ट में चल रहा है। सीएम गहलोत ने पायलट गुट की बगावत के समय बसपा को विधायकों के कांग्रेस में शामिल कर अपनी सरकार को गिरने से बचा लिया। लेकिन इस बार मायावती ने राजस्थान के लिए बड़ा प्लाना बनाया है। राजस्थान की जिम्मेदारी अपने भतीजे आनंद प्रकाश को सौंपकर मायावती ने अपने इरादे भी जाहिर कर दिए है। राजस्थान में बसपा अपना वोट बैंक है।मायावती ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान सीएम गहलोत पर जमकर हमला बोला था। मायावती ने कहा कि गहलोत सरकार दलितों की सुरक्षा करने में विफल रही है। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह गहलोत सरकार को बर्खास्त कर दें। 

बसपा का 15 जिलों पर फोकस

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में साल 2023 को प्रस्तावित विधानसभा में भले ही फिलहाल समय हो, लेकिन सभी राजनीतिक दल तैयारियों में जुटे हुए है। कांग्रेस और भाजपा ही नहीं बल्कि रालोपा, आप और बसपा जैसी पार्टियों में हलचलें तेज होने लगी है। बसपा का प्रदेश के 15 जिलों पर फोकस है। उनमें भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, जोधपुर, हनुमानगढ़, नागौर, गंगानगर, बाड़मेर, सीकर, झुंझुनूं और जयपुर शामिल है। मायावती की रणनीति से विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है। विधानसभा चुनाव 2918 में कांग्रेस ने पूर्वी राजस्थान बंपर जीत हासिल की थी। बसपा का वोट बैंक भी पूर्वी राजस्थान में है। ऐसे हर विधानसभा क्षेत्र से कुछ हजार वोट भी खिसक गए तो कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी। 



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