राजस्थान में बीजेपी की बढ़ी टेंशन, प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व पर उठे सवाल; पढ़िए इनसाइड स्टोरी


राजस्थान राज्यसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व सवाल उठ रहे हैं। सतीश पूनिया के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जितने भी फैसले लिए गए है। पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो रहे हैं। विधानसभा उप चुनाव से लेकर राज्यसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार सामना करना पड़ा है। राजस्थान में ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि भाजपा नेता आपस में ही लड़ रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राजस्थान बीजेपी के नेताओं से स्पष्ट कहा था कि संगठन बेहद कमजोर है। नीचे से निचोड़ निकालकर लाओं पार्टी कमजोर क्यों है। राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित दूसरे प्रत्याशी सुभाष चंद्रा की करारी हुई है। पूनिया भाजपा विधायकों को एकजुट नहीं रख पाए। भाजपा विधायक शोभारानी कुशवाह ने क्राॅस वोटिंग कर दी। कांग्रेस ने 4 में से 3 सीट जीत दर्ज कर ली। विधानसभा उप चुनाव से लेकर पंचायत चुनावों में सतीश पूनिया सीएम गहलोत की रणनीति को तोड़ नहीं निकाल पाए। 

पूनिया विरोधी खेमा हुआ सक्रिय 

राजस्थान की सियासत में सतीश पूनिया को वसुंधरा विरोधी माना जाता है। पार्टी को लगातार मिली रही हार पर सतीश पूनिया विरोधी खेमा सक्रिय हो गया है। राजस्थान में 2018 के बाद से बीजेपी को सभी चुनावों में हार मिली है। भाजपा ने जातीय समीकरण साधने के सतीश पूनिया को प्रदेश की कमान सौंपी थी। लेकिन सतीश पूनिया जाट समुदाय को पार्टी से जोड़ने में नाकाम रहे। आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगा दी। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव  2023 से पहले हालातों को सुधारने के लिए भाजपा आलाकमान नेतृत्व परिवर्तन कर सकता है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि सीएम गहलोत की रणनीति की काट सतीश पूनिया के पास नहीं है। पूनिया गुटबाजी थामने में विफल रहे हैं। वसुंधरा कैंप लगातार पूनिया के नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है। 

संबंधित खबरें

मेघालय के राज्यपाल मलिक बोले- अडानी का गोदाम उखाड़ फेंको

नेशनल हेराल्ड केस: गौरव वल्लभ ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा- ईडी के समन से कांग्रेस नहीं डरेगी

नेशनल हेराल्ड केस: ईडी के समन से कांग्रेस नहीं डरेगी, बोले- गौरव वल्लभ

नाव में सफर कर रहे व्यापारी ने लाइफ जैकेट उतार झील में लगाई छलांग, बिजनेस में नुकसान से था परेशान

व्यापारी ने लाइफ जैकेट उतार झील में लगाई छलांग, दंग रह गए लोग

राजस्थान में क्यों सुलगी आरक्षण की आग, डंडा लेकर आंदोलनकारी जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर डटे; जानिए क्या हैं मांगें

राजस्थान में क्यों सुलगी आरक्षण की आग, जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर कब्जा

उप चुनाव में बीजेपी दूसरी पार्टी भी नहीं बन पाई 

रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव,  मंडावा और खींवसर पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए। भाजपा के अनुकूल नहीं रहे। 2018 में हुए चुनाव में मंडावा सीट बीजेपी ने जीती थी। खींवसर सीट आरएलपी ने जीती थी। इसी प्रकार उदयपुर की वल्लभनगर और प्रतापगढ़ की धरियावद विधानसभा सीटों पर 30 अक्टूबर 2021 को हुए उपचुनाव में दोनों सीटें कांग्रेस ने जीतीं। सबसे ज्यादा विस्फोटक नतीजा धरियावद का रहा। जहां 23 हजार वोट की लीड के साथ मुख्य चुनाव जीती भाजपा को उप चुनाव में कांग्रेस ने 18 हजार वोटों से हरा दिया। कांग्रेस के नगराज मीणा की धरियावद में जीत हुई। जिन्होंने बीटीपी के बागी थावरचंद को हराया। बीजेपी के खेत सिंह तीसरे नम्बर पर रहे। जबकि वल्लभनगर में कांग्रेस की प्रीति शक्तावत 20 हजार से ज्यादा वोटों से जीतीं। बीजेपी के हिम्मत सिंह झाला की जमानत तक जब्त हो गई। भाजपा ने अपना जनाधार खोया। दोनों जगह बीजेपी दूसरी पार्टी भी नहीं बन पाई।

पंचायत चुनावों में भी भाजपा को लगा था झटका 

राजस्थान में 19 नवम्बर 2019 को 49 नगर पालिकाओं के चुनाव में कांग्रेस ने कुल 28 , भाजपा ने 16 पालिकाओं में जीत दर्ज की। इसके साथ 3 जगह निर्दलीय आगे रहे। 2 जगह परिणाम बराबर रहा। 2105 वार्डों में हुए चुनाव के नतीजों में कांग्रेस 961 वार्ड , भाजपा 737 वार्डों में जीती। निर्दलीय 386 वार्डों में विजयी रहे। बसपा के 16, माकपा ने 2 और एनसीपी ने 2 वार्डों में जीत हासिल की। 4 सितम्बर 2021 को आए पंचायत चुनाव के नतीजों में भी कांग्रेस भारी बहुमत से जीती। मुख्य विपक्षी दल भाजपा को बड़ा झटका लगा। 6 जिलों जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, सवाईमाधोपुर, दौसा और सिरोही के 200 जिला परिषद सदस्य, 1564 पंचायत समिति सदस्यों के लिए तीन चरणों में हुए मतदान के रिजल्ट में 1562 वार्डों में कांग्रेस के 670 उम्मीदवार विजयी रहे।भरतपुर में रणनीति के तहत बिना सिम्बल के 171 प्रत्याशी कांग्रेस विचारधारा के निर्दलीय चुनाव लड़कर विजयी रहे। 78 पंचायत समितियों के लिए हुए चुनावों में 60 पंचायत समितियों में कांग्रेस पार्टी के प्रधान बने। भाजपा केवल 14 पंचायत समितियों में बमुश्किल बहुमत हासिल कर सकी। 5 जिलों में कांग्रेस ने अपने उप जिला प्रमुख बनाए। जबकि बीजेपी 1 जगह ही अपना उप जिला प्रमुख बना पाई।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.