राजस्थान राज्यसभा चुनाव: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की फिल्डिंग ने कैसे बदला गेम, पढ़ें इनसाइड स्टोरी


राजस्थान की चार राज्यसभा सीटों के नतीजें साफ हो गए हैं। सूबे में भाजपा को बड़ा झटका लगा है और अशोक गहलोत की प्लानिंग काम कर गई है। सूबे की चार सीटों में से एक पर भाजपा और तीन पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा भी चुनाव हार गए हैं। इस चुनाव को मुख्यमंत्री गहलोत की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा था। अंदरखाने में ऐसी भी चर्चाएं थीं कि नतीजों के आधार पर आलाकमान राजस्थान कांग्रेस और सरकार दोनों के नेतृत्व में परिवर्तन के बारे में फैसला करेगा।

विधानसभा में विधायकों की संख्या बल के आधार पर राज्यसभा की चार सीटों में से दो पर कांग्रेस और एक पर भाजपा की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। चौथी सीट पर रोमांचक स्थित बनी हुई थी। इस सीट के लिए भाजपा ने निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा को समर्थन दिया था। वोटिंग से पहले चंद्रा ने दावा किया था कि कांग्रेस के आठ विधायक उन्हें वोट करेंगे, लेकिन वोटिंग के दौरान ऐसा नहीं हुआ।

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कुछ यूं बैठा चुनावी गणित
कुल 200 सीटों वाली विधानसभा में प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 वोट चाहिए थे। निर्वाचन अधिकारी जोगाराम ने बताया कि कांग्रेस प्रत्याशी मुकुल वासनिक को 42 मत, रणदीप सुरजेवाला को 43 एवं प्रमोद तिवारी को 41 मत मिले। भाजपा प्रत्याशी घनश्याम तिवाड़ी को 43 मत प्राप्त हुए। निर्दलीय सुभाष चन्द्रा को 30 मत मिले। कुल 200 मतों में से एक मतगणना के समय खारिज किया गया। 

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विधायकों से गहलोत ने व्यक्तिगत रूप से की बात
गौरतलब है कि राज्यसभा की तीन सीटों पर जीत हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़े इंतजाम किए थे। गहलोत ने कांग्रेस के विधायकों के अलावा निर्दलीय और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के विधायकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया। वोंटिग के पहले एक सप्ताह तक उदयपुर में बाड़ेबंदी की और विधायकों को होटल में हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराईं। इस दौरान गहलोत ने ऐसे विधायकों को पूरे विश्वास में लिया जो अफसरों या सरकार की कार्यपद्धति से नाराज बताए जा रहे थे। 

गहलोत ने मानीं कई विधायकों की शर्तें
इसके अलावा गहलोत ने निर्दलीय और बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों से भी बात की। गहलोत से जुड़े सूत्रों की मानें तो इनमें से कई विधायकों ने खुले तौर पर मुख्यमंत्री के सामने अपनी शर्तें रखीं और उन्होंने उन्हें माना भी। इन शर्तों में अधिकारियों के ट्रांसफर से लेकर विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य के लिए फंड जैसी मांगें शामिल थीं। 

पहला वोट गहलोत ने डाला
आपको बता दें कि राजस्थान में राज्यसभा की चार सीटों के लिए शुक्रवार सुबह नौ बजे मतदान शुरू हुआ था। मतदान शुरू होते ही पहला वोट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डाला था। इसके बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से कांग्रेस में आए विधायकों ने वोट डाला। इनमें मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा ने दूसरा वोट डाला। इससे पहले कांग्रेस विधायकों की पहली बस विधानसभा पहुंची जिसमें 40 से अधिक विधायक वोट डालने पहुंचे। इसके बाद भाजपा विधायकों के अलावा निर्दलीय तथा अन्य विधायकों ने वोट डाला।

जीत के बाद यह बोले गहलोत
जीत के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में तीन राज्यसभा सीटों पर कांग्रेस की विजय लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने विश्वास जताया कि तीनों नवनिर्वाचित सांसद दिल्ली में राजस्थान के हक की मजबूती से पैरवी कर सकेंगे। उन्होंने कहा, ‘यह शुरू से स्पष्ट था कि कांग्रेस के पास तीनों सीटों के लिए जरूरी बहुमत है। परन्तु भाजपा ने एक निर्दलीय को उतारकर हॉर्स ट्रेडिंग का प्रयास किया। हमारे विधायकों की एकजुटता ने इस प्रयास को करारा जवाब दिया है। 2023 विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को इसी तरह हार का सामना करना पड़ेगा।’ उन्होंने कहा, ‘पूरे मुल्क में संदेश जा चुका है कि राजस्थान में कांग्रेस एकजुट है, आने वाले 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारी हमने शुरू कर रखी है और ये जो जीत है वह प्रदेशवासियों एवं देशवासियों दोनो को ही एक संदेश दे रही है।’

नतीजों पर यह बोले गुलाबचंद कटारिया
मतदान के दौरान कांग्रेस का एक वोट खारिज हुआ। भाजपा की धौलपुर से विधायक शोभारानी कुशवाह ने ‘क्रॉस वोटिंग’ करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी तिवारी को वोट दिया। पार्टी ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए पार्टी से निलंबित कर दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा, ‘हमारे पास 71 वोट थे, इनमें से प्रथम वरीयता के 43 वोट हमारे उम्मीदवार घनश्याम तिवाड़ी को मिले। 27 वोट (निर्दलीय उम्मीदवार) सुभाष चंद्रा को मिले। हमारा एक वोट क्रॉस वोट हुआ। वह शोभारानी कुशवाह ने किया।’ उन्होंने कहा कि विधायक ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन एवं अनुशासनहीनता की है। उन्होंने कहा,’ हमने विधायक कुशवाह को तुरंत निलंबित कर दिया है। पार्टी आलाकमान को जानकारी देकर हमने विधायक से सात दिन का नोटिस दिया है। उनके जवाब के आधार पर उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जाएगा।’ 

राजस्थान में हैं विधानसभा की 10 सीटें
उल्लेखनीय है कि राजस्थान से राज्यसभा की 10 सीटें हैं। भाजपा के ओमप्रकाश माथुर, के जे अल्फोंस, रामकुमार वर्मा और हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर का कार्यकाल चार जुलाई को पूरा हो रहा है और इन सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान हुआ। आज के परिणाम के बाद कांग्रेस के छह एवं भाजपा के चार राज्यसभा सदस्य हो जाएंगे। कांग्रेस के अन्य सांसदों में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, के सी वेणुगोपाल और नीरज डांगी शामिल हैं जबकि भाजपा के अन्य राज्यसभा सदस्यों में किरोड़ी लाल, भूपेंद्र यादव (केंद्रीय मंत्री) और राजेंद्र गहलोत हैं।



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