संकट: किडनी और आंतों में भी ब्लैक फंगस का संक्रमण, एम्स में 32 वर्षीय मरीज की मौत


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जोधपुर एम्स में एक युवक भर्ती हुआ। उसे बुखार और कमर दर्द की शिकायत थी। वह करीब 45 दिन पहले कोरोना संक्रमण से ठीक हुआ था। यहां उसकी दोबारा कोरोना जांच कराई गई जो निगेटिव आई। इसके बाद उसका सीटी स्कैन करवाया गया जिसमें पता चला कि उसकी ब्लड वेन (खून की नस) में ब्लॉकेज है। 

संक्रमण कम करने के लिए एंटीबायोटिक और खून को पतला करने के लिए दवाएं दी गईं। इसके बाद भी संक्रमण समाप्त नहीं हुआ तो उसका ऑपरेशन किया गया। इसमें पता चला कि उसकी किडनी और छोटी-बड़ी आंत में फंगस के काले धब्बे पड़े हुए थे, जिसके चलते संक्रमण ठीक नहीं हुआ और मरीज की मौत हो गई। 

एम्स में भर्ती होने के बाद की गई युवक की जांचों में भी ब्लैक फंगस संक्रमण के लक्षण नहीं दिखे थे। संस्थान के यूरोलॉडी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौतमराम चौधरी इसे चौंकाने वाला मामला बताते हैं। उल्लेखनीय है कि इंडियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में इसे अपनी तरह के पहले मामले के रूप में दर्ज किया गया है।

इसके बाद से जोधपुर एम्स में ऐसे छह और मामले सामने आए हैं। इनमें से भी दो मरीजों की मौत हो चुकी है और दो की हालत गंभीर बनी हुई है। बाकी दो मरीजों का इलाज दूसरे अस्पतालों में चल रहा है। कुल मिलाकर किडनी व आंतों में ब्लैक फंगस संक्रमण के एम्स जोधपुर में अब तक कुल सात मामले सामने आ चुके हैं। 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को फिर कहा कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण के लिए राजस्थान को केंद्र सरकार की ओर से पर्याप्त टीके नहीं मिल रहे हैं। गहलोत ने केंद्र सरकार से राज्य को पर्याप्त मात्रा में टीके उपलब्ध करवाने की मांग की है।

गहलोत ने ट्वीट किया, ‘राज्य में आज टीके की लगभग 70 हजार खुराक बची हैं जो आज लगा दी जाएंगी। टीकों की कमी के कारण आज भी अधिकांश जिलों में टीकाकरण बंद हो गया है। राजस्थान को आवश्यकता के मुताबिक टीके केंद्र सरकार से नहीं मिल पा रहे हैं जिसके कारण बार-बार टीकाकरण रुक जाता है।’

सीएम ने लिखा, ‘राजस्थान में टीकों की बर्बादी भी निगेटिव है लेकिन टीकों की कमी के कारण आमजन परेशान हैं।’ उन्होंने कहा, मैं केंद्र से पुन: निवेदन करता हूं कि राजस्थान को पर्याप्त मात्रा में टीके दिए जाएं जिससे जल्द से जल्द टीकाकरण का काम पूरा हो सके और तीसरी लहर का खतरा समाप्त हो सके।

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जोधपुर एम्स में एक युवक भर्ती हुआ। उसे बुखार और कमर दर्द की शिकायत थी। वह करीब 45 दिन पहले कोरोना संक्रमण से ठीक हुआ था। यहां उसकी दोबारा कोरोना जांच कराई गई जो निगेटिव आई। इसके बाद उसका सीटी स्कैन करवाया गया जिसमें पता चला कि उसकी ब्लड वेन (खून की नस) में ब्लॉकेज है। 

संक्रमण कम करने के लिए एंटीबायोटिक और खून को पतला करने के लिए दवाएं दी गईं। इसके बाद भी संक्रमण समाप्त नहीं हुआ तो उसका ऑपरेशन किया गया। इसमें पता चला कि उसकी किडनी और छोटी-बड़ी आंत में फंगस के काले धब्बे पड़े हुए थे, जिसके चलते संक्रमण ठीक नहीं हुआ और मरीज की मौत हो गई। 

एम्स में भर्ती होने के बाद की गई युवक की जांचों में भी ब्लैक फंगस संक्रमण के लक्षण नहीं दिखे थे। संस्थान के यूरोलॉडी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौतमराम चौधरी इसे चौंकाने वाला मामला बताते हैं। उल्लेखनीय है कि इंडियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में इसे अपनी तरह के पहले मामले के रूप में दर्ज किया गया है।

इसके बाद से जोधपुर एम्स में ऐसे छह और मामले सामने आए हैं। इनमें से भी दो मरीजों की मौत हो चुकी है और दो की हालत गंभीर बनी हुई है। बाकी दो मरीजों का इलाज दूसरे अस्पतालों में चल रहा है। कुल मिलाकर किडनी व आंतों में ब्लैक फंगस संक्रमण के एम्स जोधपुर में अब तक कुल सात मामले सामने आ चुके हैं। 



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