After 550 Years Dalit Groom Bindoli Came Out In Nimbada Village Of Pali Rajpurohit Society Welcomed – Rajasthan: 550 साल में पहली बार इस गांव में निकली दलित दूल्हे की बिंदौली, राजपुरोहित समाज ने इसलिए बदली परंपरा 


राजस्थान में दलित दूल्हों की बिंदौली रोकना, उनसे मारपीट करना या फिर पुलिस के पहरे में बिंदौली निकले की खबरें आए दिन सामने आती रहती हैं। लेकिन, प्रदेश के पाली जिले में रविवार को जो हुआ उसने कई लोगों के चहरे पर खुशी ला दी। जिले के निम्बाड़ा गांव में राजपुरोहित समाज के लोगों ने सैकड़ों साल पुरानी प्रथा का खत्म कर एक नई पहल शुरू की। जिसके तहत अब दलित दूल्हों की बिंदौली भी निकाली जा सकेगी। 

दरअसल, पाली का निम्बाड़ा गांव राजपुरोहित बहुल्य हैं। बीते 550 साल में गांव में एक भी दलित दूल्हे की बिंदौली घोड़ी पर नहीं निकली। इस कारण गांव के दलित युवाओं की घोड़ी पर बिंदौली निकालने की इच्छा कभी पूरी नहीं सकी, लेकिन अब गांव में कोई भी दलित दूल्हा घोड़ी पर बिंदौली निकाल सकता है। 

राजपुरोहित समाज के लोगों ने आपसी सौहार्द बढ़ाने के लिए रविवार को एक बैठक बुलाई। जिसमें सभी जाति के लोग शामिल हुए। इस दौरान राजपुरोहित समजा के प्रमुख लोगों ने कहा, सभी चाहते हैं कि अब गांव में दलित दूल्हों की भी बिंदौली निकले। इस दौरान किसी तरह का तनाव नहीं होना चाहिए। बैठक में मौजूद सभी लोगों ने इस बात का समर्थन किया। गांव वालों ने गुड़ा एंदला एसएचओ रविन्द्रपाल सिंह राजपुरोहित को भी बुलाया और उन्हें बैठक में हुए फैसले की जानकारी दी।  

बैठक के बाद शाम को गांव में पहली बिंदौली मेघवाल समाज के उत्तम कटारिया की निकली। इस दौरान राजपुरोहित समाज के लोगों ने दूल्हे को माला पहनाई, पान खिलाया और नेग देकर बिंदौली को रवाना किया। इसके अलावा अन्य जाति के लोग भी बिंदौली में शामिल हुए। 550 साल बाद इस तरह का सकारात्मक बदलाव ने कई लोगों के चहरे पर खुशी ला दी है।



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