Rajasthan: कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, बीटीपी ने व्हिप जारी कर विधायकों को वोट नहीं करने के दिए निर्देश


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राजस्थान की चार सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव से एक दिन पहले कांग्रेस की मुश्किलें फिर बढ़ गई है। बीटीपी ने अपने दोनों विधायकों को चुनाव में भाग नहीं लेने का व्हिप जारी कर दिया है। बीटीपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. वेलाराम घोघरा ने दोनों विधायकों को पत्र लिखकर राज्यसभा चुनाव में तटस्थ रहने के निर्देश दिए हैं।

एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के साथ समझौता होने के बाद बीटीपी विधायकों के साथ की तस्वीर साझा की थी लेकिन अब बीटीपी ने अपने दोनों विधायकों से चुनाव में तटस्थ रहने को कहा है। हालांकि, सियासी जानकारों का मानना है कि बीटीपी में पार्टी लाइन से अलग चल रहे दोनों विधायकों रामप्रसाद डिंडोर और राजकुमार रोत पर इस व्हिप का कितना असर होगा, ये देखने वाली बात होगा। 

बीटीपी के प्रदेशाध्यक्ष की ओर से जारी व्हिप में कहा गया है कि कुछ प्रकरणों और विकास कार्यों में उन्हें सरकार का सहयोग नहीं मिला। विधानसभा चुनावों में मतदाताओं ने बीटीपी को वोट देकर इतिहास रचा है। कांग्रेस के संकट के समय भी बीटीपी ने सहयोग किया है। 

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पैटर्न लागू करने, 14 अप्रैल, 2019 को राज्यपाल, मुख्यमंत्री को 32 सूत्री मांग पत्र दिया है। 18 जुलाई, 2020 को फिर से 17 सूत्री मांगों से अवगत करवाया। दो अक्टूबर को 2020 शिक्षक भर्ती, 2018 कांकरी डूंगरी प्रकरण पर उच्च स्तरीय जांच के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखे। इस प्रकरण को लेकर एसआईटी गठन की मांग भी रखी। कांकरी डूंगरी हिंसा में दर्ज केस वापस लेने की मांग भी सरकार के सामने रखी लेकिन सरकार की ओर से इन मांगों पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस वजह से बीटीपी ने दोनों ही विधायकों से राज्यसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का व्हिप जारी किया है।

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राजस्थान की चार सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव से एक दिन पहले कांग्रेस की मुश्किलें फिर बढ़ गई है। बीटीपी ने अपने दोनों विधायकों को चुनाव में भाग नहीं लेने का व्हिप जारी कर दिया है। बीटीपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. वेलाराम घोघरा ने दोनों विधायकों को पत्र लिखकर राज्यसभा चुनाव में तटस्थ रहने के निर्देश दिए हैं।

एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के साथ समझौता होने के बाद बीटीपी विधायकों के साथ की तस्वीर साझा की थी लेकिन अब बीटीपी ने अपने दोनों विधायकों से चुनाव में तटस्थ रहने को कहा है। हालांकि, सियासी जानकारों का मानना है कि बीटीपी में पार्टी लाइन से अलग चल रहे दोनों विधायकों रामप्रसाद डिंडोर और राजकुमार रोत पर इस व्हिप का कितना असर होगा, ये देखने वाली बात होगा। 


बीटीपी के प्रदेशाध्यक्ष की ओर से जारी व्हिप में कहा गया है कि कुछ प्रकरणों और विकास कार्यों में उन्हें सरकार का सहयोग नहीं मिला। विधानसभा चुनावों में मतदाताओं ने बीटीपी को वोट देकर इतिहास रचा है। कांग्रेस के संकट के समय भी बीटीपी ने सहयोग किया है। 


उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पैटर्न लागू करने, 14 अप्रैल, 2019 को राज्यपाल, मुख्यमंत्री को 32 सूत्री मांग पत्र दिया है। 18 जुलाई, 2020 को फिर से 17 सूत्री मांगों से अवगत करवाया। दो अक्टूबर को 2020 शिक्षक भर्ती, 2018 कांकरी डूंगरी प्रकरण पर उच्च स्तरीय जांच के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखे। इस प्रकरण को लेकर एसआईटी गठन की मांग भी रखी। कांकरी डूंगरी हिंसा में दर्ज केस वापस लेने की मांग भी सरकार के सामने रखी लेकिन सरकार की ओर से इन मांगों पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस वजह से बीटीपी ने दोनों ही विधायकों से राज्यसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेने का व्हिप जारी किया है।



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