Rajasthan: पूनिया बोले- गांधी परिवार को खुश करने केंद्र की सभी योजनाओं का विरोध करते हैं सीएम गहलोत 


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लोकतंत्र की बात करना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेताओं को शोभा नहीं देता। देश पर आपातकाल कांग्रेस ने ही थोपा था। अनुच्छेद 356 का दुरूपयोग कर सैकड़ों बार राज्य सरकारों को अस्थिर करने के षड़यंत्र रचे गए। राजस्थान में भी कांग्रेस या अन्य पार्टी के विधायकों ने लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की कोशिश इसी कांग्रेस सरकार ने उन पर  राजद्रोह के केस दर्ज करा दिए। विधायकों की जासूसी के लिए पुलिस प्रशासन का दुरूपयोग किया गया। कांग्रेस और सीएम गहलोत पर यह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने किया। 

पूनिया ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, गहलोत ने पूर्व पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम के बारे में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। उन्हें बर्खास्त किया गया और उनके खिलाफ केस दर्ज कराए गए। यह सबको पता है। पूनिया ने कहा, राज्यसभा चुनाव के दौरान गहलोत ने भाजपा और अन्य पार्टियों के विधायकों को डराने धमकाने के लिए भी पुलिस का दुरूपयोग किया। उनके घरों पर जासूसी के लिए पुलिस का पहरा बिठा दिया गया था। क्या यह कार्यशैली लोकतंत्र की बात करने वाले अशोक गहलोत को शोभा देती है?

पूनिया ने कहा, अपने हक के लिए जयपुर में लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को सरकार ने गिरफ्तार कर उनकी आवाज को दबाया है, और मुख्यमंत्री लोकतंत्र की बात करते हैं। यह उनकी कार्यशैली से साम्यता नहीं रखती। 

उन्होंने कहा, रीट पेपर लीक मामले की सीबीआई से जांच कराने से मुख्यमंत्री को किस बात का डर है। अगर, डर नहीं है तो सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश करनी चाहिए, जिससे प्रदेश के युवाओं को न्याय मिल सके। मुख्यमंत्री सीबीआई से इसलिए जांच नहीं करवा रहे, क्योंकि इस महाघोटाला के तार कांग्रेस के बड़े नेताओं से जुड़े हुए हैं। पेपर लीक माफियाओं को कांग्रेस सरकार का संरक्षण भी मिला हुआ है। 

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लोकतंत्र की बात करना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेताओं को शोभा नहीं देता। देश पर आपातकाल कांग्रेस ने ही थोपा था। अनुच्छेद 356 का दुरूपयोग कर सैकड़ों बार राज्य सरकारों को अस्थिर करने के षड़यंत्र रचे गए। राजस्थान में भी कांग्रेस या अन्य पार्टी के विधायकों ने लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की कोशिश इसी कांग्रेस सरकार ने उन पर  राजद्रोह के केस दर्ज करा दिए। विधायकों की जासूसी के लिए पुलिस प्रशासन का दुरूपयोग किया गया। कांग्रेस और सीएम गहलोत पर यह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने किया। 

पूनिया ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, गहलोत ने पूर्व पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम के बारे में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। उन्हें बर्खास्त किया गया और उनके खिलाफ केस दर्ज कराए गए। यह सबको पता है। पूनिया ने कहा, राज्यसभा चुनाव के दौरान गहलोत ने भाजपा और अन्य पार्टियों के विधायकों को डराने धमकाने के लिए भी पुलिस का दुरूपयोग किया। उनके घरों पर जासूसी के लिए पुलिस का पहरा बिठा दिया गया था। क्या यह कार्यशैली लोकतंत्र की बात करने वाले अशोक गहलोत को शोभा देती है?

पूनिया ने कहा, अपने हक के लिए जयपुर में लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को सरकार ने गिरफ्तार कर उनकी आवाज को दबाया है, और मुख्यमंत्री लोकतंत्र की बात करते हैं। यह उनकी कार्यशैली से साम्यता नहीं रखती। 

उन्होंने कहा, रीट पेपर लीक मामले की सीबीआई से जांच कराने से मुख्यमंत्री को किस बात का डर है। अगर, डर नहीं है तो सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश करनी चाहिए, जिससे प्रदेश के युवाओं को न्याय मिल सके। मुख्यमंत्री सीबीआई से इसलिए जांच नहीं करवा रहे, क्योंकि इस महाघोटाला के तार कांग्रेस के बड़े नेताओं से जुड़े हुए हैं। पेपर लीक माफियाओं को कांग्रेस सरकार का संरक्षण भी मिला हुआ है। 



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