Rajasthan: भाजपा कार्यसमिति की बैठक में एंट्री को लेकर हंगामा, नेताओं में धक्का-मुक्की व गाली गलौज


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: रोमा रागिनी
Updated Wed, 15 Jun 2022 03:21 PM IST

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कोटा में दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का बुधवार को दूसरा दिन है। इसमें पूर्व सीएम वसुंधरा राजे शामिल होने पहुंची तो उनके मीडिया एडवाइजर और पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। इसके साथ ही एंट्री को लेकर भाजपा नेता कार्यकर्ता भिड़ गए और एक दूसरे को अपशब्द भी कहे।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार एंट्री को लेकर पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष प्रहलाद पवार और अन्य कार्यकर्ता आपस में उलझ गए। इसके साथ ही राजे के मीडिया एडवाइजर और सिक्योरिटी गार्ड भी लड़-झगड़ कर अंदर दाखिल हो गए। कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत को भी अंदर नहीं जाने दिया। हालांकि जब उन्हें अंदर मीटिंग में प्रवेश नहीं मिला, तब वह वापस परिसर से बाहर निकल गए।

वहीं भवानी सिंह राजावत ने वसुंधरा राजे को नेतृत्व सौंपने की मांग उठा दी। इसी दौरान एंट्री नहीं देने पर उन्होंने कहा कि मैं तीन बार विधायक हूं लेकिन यह नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष को तय करना है कि किसे कार्यसमिति में रखें और नहीं, हमें नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को हमें सम्मान देना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं दिया और हमें कार्यकारिणी में नहीं रखा।

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कोटा में दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का बुधवार को दूसरा दिन है। इसमें पूर्व सीएम वसुंधरा राजे शामिल होने पहुंची तो उनके मीडिया एडवाइजर और पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। इसके साथ ही एंट्री को लेकर भाजपा नेता कार्यकर्ता भिड़ गए और एक दूसरे को अपशब्द भी कहे।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार एंट्री को लेकर पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष प्रहलाद पवार और अन्य कार्यकर्ता आपस में उलझ गए। इसके साथ ही राजे के मीडिया एडवाइजर और सिक्योरिटी गार्ड भी लड़-झगड़ कर अंदर दाखिल हो गए। कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत को भी अंदर नहीं जाने दिया। हालांकि जब उन्हें अंदर मीटिंग में प्रवेश नहीं मिला, तब वह वापस परिसर से बाहर निकल गए।

वहीं भवानी सिंह राजावत ने वसुंधरा राजे को नेतृत्व सौंपने की मांग उठा दी। इसी दौरान एंट्री नहीं देने पर उन्होंने कहा कि मैं तीन बार विधायक हूं लेकिन यह नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष को तय करना है कि किसे कार्यसमिति में रखें और नहीं, हमें नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को हमें सम्मान देना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं दिया और हमें कार्यकारिणी में नहीं रखा।



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