Rajasthan: सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवक ने फांसी लगाकर दी जान, अग्निपथ योजना के लागू होने से था मायूस


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
Published by: रोमा रागिनी
Updated Mon, 20 Jun 2022 10:38 AM IST

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देश भर में अग्निपथ योजना का विरोध जारी है। इस योजना के विरोध में सोमवार को भारत बंद है। इसी बीच भरतपुर में अग्निपथ योजना से आहत एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार भरतपुर जिले के चिकसाना थाना क्षेत्र के बिलौठी गांव निवासी कन्हैया गुर्जर (22) पुत्र महाराज सिंह गुर्जर ने खेत में पेड़ से फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बताया कि अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से युवक ने दौड़ भाग करना छोड़ दिया और मायूस रहने लगा। युवक कबड्डी का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी था। वहीं 12वीं के बाद से ही वह सेना में जाने के लिए तैयारी कर रहा था।

परिजनों ने बताया कि जब से अग्निपथ योजना की घोषणा हुई, तभी से कन्हैया ने दौड़ना बंद कर दिया। परिजनों के बार-बार समझाने पर भी वो सेना की तैयारी के लिए सुबह दौड़ने नहीं जा रहा था। कन्हैया का कहना था कि अब उसका सैनिक बनने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। चार साल बाद आकर भी जब कुछ और काम करना है तो अभी से क्यों ना किया जाए। 

सोमवार सुबह जब सभी परिजन जागे तो कन्हैया घर में नहीं था। जिसके बाद परिजनों ने उसे तलाशना शुरू किया तो उसका शव गांव से बाहर खेत में फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला। मृतक के पिता किसान हैं और भाई मजदूरी करते हैं। सभी का सपना था कि कन्हैया फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करे।

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देश भर में अग्निपथ योजना का विरोध जारी है। इस योजना के विरोध में सोमवार को भारत बंद है। इसी बीच भरतपुर में अग्निपथ योजना से आहत एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।


मीडिया रिपोर्टस के अनुसार भरतपुर जिले के चिकसाना थाना क्षेत्र के बिलौठी गांव निवासी कन्हैया गुर्जर (22) पुत्र महाराज सिंह गुर्जर ने खेत में पेड़ से फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बताया कि अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से युवक ने दौड़ भाग करना छोड़ दिया और मायूस रहने लगा। युवक कबड्डी का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी था। वहीं 12वीं के बाद से ही वह सेना में जाने के लिए तैयारी कर रहा था।


परिजनों ने बताया कि जब से अग्निपथ योजना की घोषणा हुई, तभी से कन्हैया ने दौड़ना बंद कर दिया। परिजनों के बार-बार समझाने पर भी वो सेना की तैयारी के लिए सुबह दौड़ने नहीं जा रहा था। कन्हैया का कहना था कि अब उसका सैनिक बनने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। चार साल बाद आकर भी जब कुछ और काम करना है तो अभी से क्यों ना किया जाए। 


सोमवार सुबह जब सभी परिजन जागे तो कन्हैया घर में नहीं था। जिसके बाद परिजनों ने उसे तलाशना शुरू किया तो उसका शव गांव से बाहर खेत में फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला। मृतक के पिता किसान हैं और भाई मजदूरी करते हैं। सभी का सपना था कि कन्हैया फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करे।



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