Rajya Sabha Election: सुभाष चंद्रा के बयान के बाद कांग्रेस सक्रिय, सीईसी को लिखा पत्र, हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप


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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो गए हैं। निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा की चुनावों में इंट्री और उनके दावे के बाद कांग्रेस खेमे में धड़कनें तेज हो गई हैं। चंद्रा ने दावा किया था कि कांग्रेस के आठ विधायक क्रॉस वोटिंग कर उनकी जीत सुनिश्चित करेंगे। इसे लेकर कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाते हुए शिकायत की है। 

चंद्रा के बयान के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाए हैं। इसमें चंद्रा के बयान का हवाला दिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम लिखे पत्र में कांग्रेस ने हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई है। साथ ही तुरंत कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। कांग्रेस ने अपने पत्र में वोटिंग प्रक्रिया का गुणा-भाग भी समझाया है। 

कांग्रेस का दावा- 126 विधायकों का साथ

कांग्रेस ने पत्र में लिखा है कि पार्टी और उसे समर्थन दे रहे विधायकों की संख्या 126 है। इसमें कांग्रेस के 108, निर्दलीय 13, बीटीपी के दो, सीपीएम के दो और आरएलडी के एक विधायक शामिल हैं। इसी तरह भाजपा के कुल विधायक 71 हैं। हनुमान बेनीवाल की आरएलपी के तीन विधायक हैं। भाजपा और आरएलपी का गठबंधन टूट चुका है। विधायकों के समर्थन के आधार पर स्पष्ट है कि कांग्रेस के 3 प्रत्याशी राज्यसभा जा सकते हैं। एक विधायक के वोट का वेटेज राज्यसभा चुनाव में 100 आंका गया है। यानी 4,001 वैटेज वोट मिलने पर राज्यसभा प्रत्याशी को चुना जाएगा। चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी को 40.1 (40.1X100 = 4001) विधायकों का वोट चाहिए होगा। यानी 41 विधायकों के वोट के आधार पर राज्यसभा प्रत्याशी की जीत होगी। कांग्रेस के तीन सांसदों को जीत के लिए 123 वोट चाहिए, जबकि उसके पास 126 वोट हैं। कांग्रेस ने रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी को प्रत्याशी बनाया है। 

निर्दलीय प्रत्याशी की जीत के लिए भाजपा सक्रिय
भारतीय जनता पार्टी के 71 विधायक हैं। भाजपा ने घनश्याम तिवाड़ी को पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। मीडिया बैरन सुभाष चंद्रा निर्दलीय उम्मीदवार हैं, जिन्हें भाजपा ने समर्थन दिया है। सुभाष चंद्रा के नामांकन पत्र का अनुमोदन करने वाले सभी 10 प्रपोज़र राजस्थान के भाजपा विधायक हैं। किसी भी निर्दलीय विधायक ने सुभाष चंद्रा के नामांकन पत्र का अनुमोदन नहीं किया। भाजपा के पास एक राज्यसभा उम्मीदवार को चुनने के लिए 41 विधायक हैं व 30 अतिरिक्त वोट हैं। हनुमान बेनीवाल की आरएलपी को भी इसमें जोड़ लिया जाए, तो भाजपा+आरएलपी के पास मात्र 33 विधायकों का वोट है। यहां यह दोहराना जरूरी है कि 41 विधायकों के वोट से कम राज्यसभा सदस्य नहीं चुना जा सकता। साफ है कि भाजपा और सुभाष चंद्रा हॉर्स ट्रेडिंग, धन-बल व ईडी, सीबीआई तथा आयकर जैसी केंद्रीय सरकारी एजेंसियों की धौंस दिखाकर जबरदस्ती एक राज्यसभा सीट जीतने का कुत्सित षड्यंत्र कर रहे हैं।

हरियाणा के चुनावों का जिक्र भी किया
कांग्रेस ने अपने पत्र में हरियाणा से राज्यसभा में चुने जाने के प्रकरण का जिक्र किया है। पत्र में लिखा है कि हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में भी पेन बदलकर सुभाष चंद्रा राज्यसभा चुनाव में ऐसा प्रयास कर चुके हैं। इसके चलते चुनाव आयोग को अपनी चुनाव प्रक्रिया तक बदलनी पड़ी थी। 

आप का आरोप- बेनीवाल ने 40 करोड़ में बेचे अपने विधायक

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी विनय मिश्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, ‘सुना है कि राजस्थान में एक पार्टी के अध्यक्ष ने अपनी पार्टी के तीन विधायकों को एक न्यूज चैनल के मालिक को राज्यसभा में अपने तीन विधायकों का वोट डलवाने के लिये 40 करोड़ रुपये लिए हैं। आखिर कब तक चलेगी ये खरीद-फरोख्त?’ विनय मिश्रा ने कहा कि, ‘3 MLA= 30 करोड़, 10 करोड़ अपना खर्च, पार्टी ने अपने कुल तीन एमएलए राज्यसभा चुनाव में बेच कर, कुल 40 करोड़ रुपये झटके में उठा लिए। ये भी नही सोचा को किसान भाईयों पर क्या गुजर रही होगी?’

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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो गए हैं। निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा की चुनावों में इंट्री और उनके दावे के बाद कांग्रेस खेमे में धड़कनें तेज हो गई हैं। चंद्रा ने दावा किया था कि कांग्रेस के आठ विधायक क्रॉस वोटिंग कर उनकी जीत सुनिश्चित करेंगे। इसे लेकर कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाते हुए शिकायत की है। 



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