जेपी नड्डा की नसीहत को भूले किरोड़ी लाल और राजेंद्र राठौड़, जानें दोनों नेताओं की अदावत की वजह


राजस्थान के भाजपा नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की नसीहत को खुली चुनौती दे रहे हैं। जेपी नड्‌डा की माउंट आबू में दी गई एकता की नसीहत 24 घंटे में ही बेअसर हो गई। भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीना और राजेंद्र राठौड़ भिड़ गए।  राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को एक पांच सितारा होटल में विधायकों को संबोधित करना था, लेकिन उनके आने से पहले आदिवासियों की एंट्री पर किरोड़ी लाल मीना व उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ में तकरार हो गई। यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले कोटा में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को बीच में ही छोड़कर वसुंधरा राजे चली गई थीं। जबकि बैठक में प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह और  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया मौजूद थे। पूर्व मुख्यमंत्री की नाराजगी से साफ जाहिर है कि प्रदेश भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। ऐसे में विभिन्न में बंटी बीजेपी के लिए गहलोत सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का माहौल तैयार करना आसान नहीं है। 

जेपी नड्डा ने माउंट आबू में पढ़ाया था अनुशासन का पाठ 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को माउंट आबू में  भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग के अंतिम दिन बिना किसी का नाम लिए अनुशासन में रहने की नसीहत दी। जेपी नड्डा ने कहा कि 2023 और 2024 भाजपा का है। चुनाव में चुनावी चेहरा पीएम मोदी होंगे और चुनावी ताकत कार्यकर्ता। मुख्यमंत्री चेहरे के लेकर चल रही खींचतान के बीच जेपी नड्डा की नसीहत काफी अहम मानी जा रही है थी, लेकिन नड्डा की नसीहत के अगले ही दिन सांसद किरोड़ी लाल और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की तू-तू मैं मैं हो गई है। राजस्थान बीजेपी में आंतरिक कलह ने जोर पकड़ रखा है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय नेतृत्व सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है लेकिन एक धड़ा वसुंधरा राजे को सीएम फेस के लिए आगे रखने का दबाव लगातार बना रहा है।

किरोड़ी की राठौड़ से नाराजगी की वजह 

राजस्थान की राजनीती में किरोड़ी लाल मीना के पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के साथ संबंध बनते बिगड़ते रहे हैं। राजेंद्र राठौड़ के वसुंधरा कैंप का माना जाता था। लेकिन उप नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद राजेंद्र राठौड़ बदल गए। दोनों नेताओं की अदावत की वजह सामने आई है। राजेंद्र राठौड़ को द्रौपदी मुर्मू का पोलिंग एजेंट बनाए जाने से किरोड़ीलाल नाराज हो गए है। कार्यकर्तां को एंट्री नहीं देने के बहाने किरोड़ी लाल ने राजेंद्र राठौड़ को निशाने पर ले लिया। किरोड़ी लाल खुद को बड़ा आदिवासी नेता मानते हैं। किरोड़ी समर्थकों को कहना है कि भाजपा में किरोड़ी से बड़ा आदिवासी नेता नहीं है। इसलिए द्रौपद्री मुर्मू के जयपुर दौरे की जिम्मेदारी किरोड़ी लाल को देनी चाहिए थी। लेकिन पार्टी ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को अहमियत देकर किरोड़ी को नाराज कर दिया। किरोड़ी लाल को राजस्थान भाजपा में बड़ा पद नहीं मिला है। प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और राजेंद्र राठौड़ वरिष्ठता के हिसाब से किरोड़ी से बहुत पीछे हैं। 

 भाजपा के लिए राजस्थान का रास्ता अभी भी कांटों भरा

पिछले महीने जयपुर में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने साफ कहा था कि विधानसभा चुनाव में पार्टी सामूहिक नेतृत्व में मैदान में उतरेगी लेकिन इसके बावजूद बीजेपी में गुटबाजी कम होने का नाम नहीं ले रही है। बताया जा रहा है कि भाजपा नेताओं की खींचतान से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नाराज है। भाजपा के लिए राजस्थान का रास्ता अभी भी कांटों भरा है। राज्यसभा चुनाव में हुए नुकसान और पार्टी की राज्य इकाई में गुटबाजी बीजेपी आलाकमान के लिए 2023 की चिंता बनी हुई है। 

 



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