जब्त किए गए रकम और सोने की ईंट।
– फोटो : अमर उजाला

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राजधानी जयपुर में सरकार की नाक के नीचे सचिवालय के ठीक पीछे स्थित योजना भवन के बेसमेंट में डिपार्टमेंट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी ( DOIT) विभाग का जॉइंट डायरेक्टर वेदप्रकाश यादव घूसखोरी मामले में ACB में गिरफ्तार होने के बाद निलंबित कर दिया गया है। भ्रष्टाचार के आरोपी जॉइंट डायरेक्टर वेदप्रकाश यादव को DOIT विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी IAS अखिल अरोडा ने आदेश जारी कर को निलंबित कर दिया। DOIT के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी अब ACB के शक के घेरे में आ गए हैं। इसलिए पूरे महकमे में हड़कंप और खलबली के हालात बने हुए हैं।

रात 3 बजे ACB ने किया गिरफ्तार, कोर्ट ने 3 दिन के रिमांड पर भेजा

रात 3 AM बजे एसीबी ने आरोपी वेद प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर लिया। उसे पुलिस ने अपनी हिरासत से ACB को तब सौंप दिया, जब पुलिस ने CCTV में आरोपी जॉइंट डायरेक्टर को वह बैग अलमारी में रखते हुए देखा और हिरासत में लेने के बाद कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने 2.31 करोड़ रुपए को अपने रिश्वत का पैसा होने की बात को स्वीकार कर लिया। इसके बाद ACB ने रविवार को अवकाश के दिन आरोपी को कोर्ट के जज के समक्ष उनके घर पर पेश किया। जहां से कोर्ट ने उसे 3 दिन के एसीबी रिमांड पर सौंप दिया है। 

एसीबी के एडिशनल एसपी ललित किशोर शर्मा कर रहे जांच

एसीबी के एडिशनल एसपी ललित किशोर शर्मा मामले की जांच कर रहे हैं। रिमांड पर कड़ाई से वेद प्रकाश यादव से पूछताछ की जा रही है। एसीबी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कब-कब, किस-किस ठेके और टेंडर में कितनी रिश्वत और कमीशन की राशि ली गई और इस भ्रष्टाचार में उसके साथ अन्य कौन-कौन अफसर-कर्मचारी शामिल रहे हैं।

पर्सनल लॉकर की तरह सरकारी ऑफिस अलमारी को घूस का माल छिपाने के लिए किया इस्तेमाल 

वेदप्रकाश यादव परचेज कमेटी का मेंबर था, यह जानकारी सामने आई है।  वह सालों से जमकर घूसखोरी करता रहा और सरकारी विभाग की अलमारी में ही घूस का पैसा पर्सनल लॉकर की तरह जमा करता और निकालता रहा। अलमारी में 2.31 करोड़ से ज्यादा रुपए और सोने की 1 किलो सिल्ली से भरा बैग रखते रखते हुए पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाल कर आरोपी को देख लिया और  झोटवाड़ा स्थित घर पर छापा मारकर आरोपी को गिरफ्तार किया।

इसके बाद सरकारी लोक सेवक के खिलाफ रिश्वत और आय से अधिक आय और संपत्ति का मामला होने पर उसे एसीबी को सौंप दिया गया। ACB यह पता लगाने में भी जुटी है कि विभाग से संबंधित डिजिटलाइजेशन और अन्य का कार्यों के ठेके किस-किस फर्म को कब-कब दिए गए और उसमें कितनी कमीशन की राशि या भ्रष्टाचार का पैसा लिया गया और इसमें ज्वाइंट डायरेक्टर वेद प्रकाश यादव के अलावा परचेज कमेटी के अन्य कौन-कौन सदस्य शामिल रहे?

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