नगर निगम और स्वायत्त शासन भवन जयपुर
– फोटो : अमर उजाला

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सरकारी नौकरी लेने की मानसिकता आज भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं। चाहें सरकारी के नाम पर कोई भी नौकरी हो। हाल ही में राजस्थान में सफाईकर्मियों की भर्ती निकाली गई है, जिसमें 13 हजार एक सौ 84 कुल पदों के लिए आठ लाख के करीब लोगों ने आवेदन किए हैं। जिसमें पीजी और प्रोफेशनल डिग्री धारी भी लाइन में लगे हुए हैं। जिसे देखकर विभाग के अधिकारी भी चकित रह गए।

नौकरी तो सरकारी ही होनी चाहिए फिर चाहे फोर्थ ग्रेड ही मिले, यह मानसिकता मध्यम वर्ग के भारतीय नागरिकों के बचपन से ही उनके दिमाग में भर दी जाती हैं। हाल ही में राजस्थान सरकार के नगरीय निकायों में स्वायत्त शासन ने सफाई कर्मियों की भर्ती निकाली। इस भर्ती में 13 हजार एक सौ 84 पद हैं। इसके लिए करीब 8 लाख आवेदन आ चुके हैं। हैरानी की बात है कि इसके लिए ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और अन्य प्रोफेशनल डिग्री धारी युवाओं भी आवेदन किया हैं। 

दरअसल,176 नगरीय निकायों में स्वायत्त शासन विभाग की ओर से सफाईकर्मियों के लिए 13 हजार एक सौ 84 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। सफाई कर्मचारियों के लिए एक साथ इतने आवेदन आने से विभाग के आला अधिकारी भी हैरान हैं। सबसे ज्यादा आवेदन जयपुर ग्रेटर में तीन हजार छह सौ 70 पदों के लिए तीन लाख 35 हजार आवेदन आए हैं। जबकि हेरिटेज निगम में 108 पदों के लिए दो लाख 20 हजार लोगों ने आवेदन किए हैं। ऐसे में प्रत्येक पद के लिए   हाई लेवल का कंपीटिशन हैं।

नगर निगम जयपुर हैरिटेज

ग्रेटर निगम में 200 से ज्यादा हायर डिग्री आवेदन आए है। डीएलबी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सफाई कर्मचारी के 13 हजार एक सौ 84 पदों के लिए लाखों की संख्या में युवाओं ने आवेदन किए हैं। इन पदों पर आवेदक के पास कम से कम एक साल का अनुभव प्रमाण पत्र भी मांगा गया था। साथ ही भर्ती में वाल्मीकि समाज के लोगों को प्राथमिकता दी गई है। फिर भी आठ लाख से अधिक आवेदकों ने नौकरी में अपना भाग्य आजमाया है।

सफाई कर्मी बनने के लिए प्रोफेशनल डिग्रीधारी भी कतार में

सबसे रोचक बात यह भी है कि सफाई कर्मचारी बनने वालों की कतार में प्रोफेशनल डिग्री वाले भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार ग्रेटर निगम में भी 200 से अधिक उच्च कोटि की योग्यता रखने वाले युवाओं ने भी सफाई कर्मचारी बनने के लिए आवेदन किया हैं। सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओ का क्रेज देखने को मिलता रहा है पर आज के डिजिटल युग मैं छोटी सी सरकारी नौकरी के प्रति दीवानगी देखते ही बनतीं है। 

ज्यादा आवेदन आने से वाल्मीकि समाज के लोग नाराज

इस दीवानगी के चलते वाल्मीकि समाज नाराज हो गया है उनका कहना है कि उनके समाज के लोग सिर्फ यही काम करते है,यहां भी अगर बाकी वर्ग आ जाएगा तो वाल्मीकि समाज के युवाओ के आगे रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के अध्यक्ष नंद किशोर डंडोरिया ने बताया कि नगर निगम में जिस हिसाब से सफाई कर्मचारी बनने के लिए आठ लाख से अधिक आवेदन आए हैं, उससे वाल्मीकि समाज के युवाओं को ज्यादा मशक्कत करनी पड़ेगी। इस नौकरी पर पहला हक समाज के युवाओं का है। सरकार और हाईकोर्ट ने समाज को प्राथमिकता पर नौकरी देने के लिए कहा है। विभाग को पहले समाज के युवाओं का आवेदन ही भर्ती प्रक्रिया में प्राथमिकता से लेना चाहिए।

जानिए भर्ती प्रक्रिया का पूरा प्रोसेस

भर्ती की परीक्षा दो चरणों में होगी, पहला चरण प्रेक्टिकल परीक्षा का होगा। पहले चरण में चयनित अभ्यर्थियों को इंटरव्यू देना होगा। प्रक्रिया में आवेदन 16 जून से शुरू हुए थे, जो कि चार अगस्त तक चले थे। इसके बाद नौ अगस्त रात तक का समय संशोधन के लिए आवेदकों को दिया था। भर्ती प्रक्रिया में विभाग ने कई बार संशोधन भी किए थे। सबसे बड़ा संशोधन चयनित युवाओं के लिए प्रेक्टिकल परीक्षा का आयोजन का किया था। इस दौरान अभ्यर्थियों को निरीक्षकों के सामने छह प्रकार से प्रेक्टिकल देना होगा। इसमें अभ्यर्थियों को मौके पर जाकर नालियों की साफ- सफाई, नालों की सफाई, सीवर के सम्बंधित सफाई, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, उद्यानों की सफाई करनी होगी। इसके लिए 50 अंक रखे गए हैं। इसके अलावा चयनित अभ्यर्थी का 30 अंकों का इंटरव्यू भी लिया जाएगा। भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता बनाने के लिए वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। इसके अलावा अभ्यर्थी को एक साल का अनुभव प्रमाण पत्र भी देना होगा। विभाग इस भर्ती में वाल्मीकि समाज के युवाओं का प्राथमिकता के आधार पर चयन करेगा।

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