पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
– फोटो : Amar Ujala Digital

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नागौर पुलिस ने गुरुवार सुबह हार्डकोर तीन बदमाशों को पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच नागौर के कोर्ट में पेश किया। इनमें एक अपराधी जोधपुर जेल में बंद था बाकी दो अजमेर जेल बंद थे। नागौर पुलिस तीनों हार्डकोर अपराधियों को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच नागौर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आईपीसी की धारा 307 में तीनों को दोष पाया है।

 

बता दें कि नागौर जिले के गुड़ा भगवानदास गांव में वर्ष 2016 में राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह और उसके साथी फरारी काटने के लिए नागौर से गुजरते हुए जोधपुर की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान देर रात कंट्रोल रूम पर वायरलेस के जरिए सूचना मिली, जिसमें बताया कि फॉर्च्यूनर गाड़ी में कुछ संदिग्ध बदमाश हैं। सूचना मिलते ही नागौर की क्यूआरटी टीम ने उनका पीछा शुरू किया। पीछा करते-करते जब वह गुड़ा भगवानदास गांव पहुंच गए उस दौरान आनंदपाल सिंह और उसके अन्य साथियों और पुलिस के जवानों के बीच मुठभेड़ हुई थी। 

मुठभेड़ के दौरान नागौर पुलिस की क्यूआरटी टीम के कांस्टेबल खुमाराम और हरेंद्र डूडी घायल हुए थे। बदमाश मौके फरार हो गए थे। पुलिस दोनों घायलों को जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में लेकर गई, जहां इलाज के दौरान खुमाराम की मौत हो गई। वहीं, हरेंद्र डूडी के पैर में चार गोलियां लगी थीं, जिसका कई महीने इलाज चला। 

पुलिस ने इन बदमाशों को गिरफ्तार करने के लिए अलग-अलग टीमें गठित कीं और बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें महिपाल सिंह उर्फ मोंटी, आजाद सिंह, बलवीर उर्फ़ बलू, कुलदीप उर्फ केडी को नागौर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया आजाद सिंह जिसको नागौर पुलिस ने जोधपुर की जेल में शिफ्ट किया था। वहीं, कुलदीप और बलवीर को अजमेर की सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया।

नागौर कोर्ट को किया छावनी में तब्दील 

नागौर पुलिस ने हार्डकोर अपराधियों की सुरक्षा व्यवस्था के चलते कोर्ट परिसर के बाहर हथियारबंद पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दिए। वर्ष 2022 में हरियाणा के कुख्यात सुपारी किलर गैंगस्टर संदीप सेठी जब पेशी के दौरान नागौर कोर्ट आया था। उस दौरान उस पर कोर्ट परिसर के बाहर गोलियों से भूनकर हत्या की थी, जिसके कारण पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था पर जवान खड़े कर दिए। 

आरोपियों के अधिवक्ता ने पुलिस पर किए सवाल खड़े

अधिवक्ता महावीर विश्नोई ने पुलिस पर सवाल खड़े किए हैं और कहा कि अभियुक्तों की तरफ से बार-बार न्यायालय में प्रार्थना की। कहा कि कुछ लोग हैं जो इनको वास्तव में न्याय नहीं दिलवा चाहते हैं, जिसके कारण न्यायालय के बार-बार कहने पर भी इनको न्यायालय में पेश नहीं कर रहे थे। आखिर में जब न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया तब जाकर आज यानी साढे़ सात साल बाद नागौर पुलिस ने इनको कोर्ट में पेश किया और कोर्ट में साढे़ सात साल बाद इनको दोषी ठहराया। 

एक मुलजिम अभी बेल पर 

आज नागौर पुलिस ने चार मुजरिमों को कोर्ट में पेश करना था, जिसमें एक मुलजिम अभी बेल पर चल रहा है। वह बीमार है और वो इलाज के लिए वह चेन्नई गया हुआ है। वहीं तीन अपराधी हैं जिसमें एक जोधपुर की सेंट्रल जेल में था और दो अजमेर की सेंट्रल जेल में थे, जिनको नागौर कोर्ट में लाया गया। आजाद सिंह बलवीर उर्फ़ बलू कुलदीप उर्फ केडी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और मजिस्ट्रेट ने इनको दोषी ठहराया। इस केस में सबसे बड़ी बात यह रही की यह आरोपी साढ़े सात साल से जेल में बंद थे, लेकिन कोर्ट ने इन पर कोई जुर्म प्रमाणित नहीं किया। जब यह मामला राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष में पहुंचा तब जाकर आज पुलिस उनको लेकर आई है। एडवोकेट कुलदीप राठौड़ ने बताया कि न्यायालय ने तीन आरोपियों को आईपीसी की धारा 307 में आरोपी बनाया गया।

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