खेमराज गरासिया
– फोटो : सोशल मीडिया

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राजस्थान के आदिवासी अंचल से कांग्रेस-भाजपा के लिए नई चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है। कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले बांसवाड़ा में सेंध लगाने के लिए भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) ने भाजपा के बागी पूर्व विधायक खेमराज गरासिया को पार्टी में शामिल कर लिया है। अब गरासिया के जरिए बीएपी बांसवाड़ा में कांग्रेसी विधायक मालवीय की सत्ता को चुनौती देगी।

राजस्थान की ट्राबइल बेल्ट में आने वाली 17 एसटी रिजर्व सीटों पर इस बार चुनाव रोचक रहने वाले हैं। इसकी वजह है भारत आदिवासी पार्टी, जो यहां भाजपा के बड़े चेहरों को तोड़कर कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर रही है। भाजपा के पूर्व विधायक खेमराज गरासिया ने बीएपी का दामन थाम लिया है। शनिवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के जरिए पार्टी इसका एलान भी करेगी।

जानिए, गरासिया ने क्यों बढ़ाई कांग्रेस की चिंता

खेमराज गरासिया 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के टिकट पर बांसवाड़ा की बागीदौरा सीट से लड़े थे। हालांकि, चुनाव कांग्रेस के महेंद्रजीत मालवीय ने जीता था। लेकिन गरासिया को भी 76 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। बताया जाता है कि इसमें इनके खुद के वोट करीब 30 हजार से ज्यादा हैं। दरअसल, बागीदौरा मालवीय का गढ़ माना जाता है और उनकी छवि यहां दबंग नेता की है। सिर्फ गरासिया ही एक मात्र चेहरा हैं, जो उन्हें यहां चुनौती दे सकते हैं।

हालांकि, भाजपा इस बार यहां से कृष्णा कटारा को टिकट दे चुकी है। इसलिए गरासिया का एक्जिट तय था। बीएपी के संस्थापक विधायक राजकुमार रोत का कहना है कि गरासिया के आने के बाद पार्टी बांसवाड़ा रीजन में मजबूत होगी। अब तक पार्टी नौ टिकटों का एलान कर चुकी है। इनके अलावा आठ टिकट अभी और घोषित होने हैं। इसमें कुशलगढ़, उदयपुर ग्रामीण, बांसवाड़ा और जाडौल से भी इस बार पार्टी अपने प्रत्याशी उतारने जा रही है।

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