करवा चौथ का पर्व
– फोटो : सोशल मीडिया

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1 नवंबर को पूरे देश में करवा चौथ का पर्व बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। अगर हम बात करें राजस्थान की तो यहां भी महिलाएं अपने पतियों के लिए निर्जला व्रत रखती है। इसके साथ ही रात्रि में चंद्रमा को देखकर पति से आशीर्वाद लेती हैं। बता दें कि करवा चौथ की पूजा इस बार 1 नवंबर को 5 पांच बजकर 44 मिनट से शाम 7 बजकर 2 मिनट तक की जा सकेगी। इसके साथ ही राजधानी जयपुर में इस बार रात के 8 बजकर 19 मिनट पर चंद्रोदय होगा।

इधर, ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर मंगलवार को रात 9 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 1 नवंबर को रात 9 बजकर 19 मिनट तक है। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ्र का व्रत 1 नवंबर बुधवार को रखा जाएगा। करवा चौथ की पूजा 1 नवंबर को 5 पांच बजकर 44 मिनट से शाम 7 बजकर 2 मिनट तक की जा सकती है।

क्यों मनाया जाता है करवाचौथ पर्व?

ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत शादीशुदा महिलाएं करती हैं। ये व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सुहाग की कामना के लिए रखती है।

करवा पर चांद क्यों देखते हैं

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान गणेश का सिर जब धड़ से अलग हुआ था तो उनका सिर चंद्रलोक चला गया था। चंद्रलोक में गणेश जी का सिर होने के कारण चतुर्थी यानि करवा चौथ के दिन गणेश जी की पूजा के बाद चंद्रमा की भी पूजा की जाती है। इसके साथ ही करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा करने से रोग, कष्ट और पाप मिट जाते हैं। चंद्रमा को शीतलता और प्रेम आदि का भी प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द में वृद्धि करता है।

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